और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !
बच्चो के भूखे बिलखने पर जब आत्मा कुलबुलाती है,
तब घर में अन्न न होने पर, माँ पानी पिला सुलाती है !
और तुम छोड़ देते हो भरी तश्तरी, जरा नमक कम होने पर,
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
परदेस में जाके हर भारतीय, अति शालीन बन जाता है,
सब नियमो और कानूनों को, सहर्ष ही अपनाता है.!
पर यहाँ नहीं सकुचाता है, दीवार को पीक से धोने पर,
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
इश्वर ने सबको एक रचा, सबको सामान ही अंग दिए,
पर हमने भ्रात-प्रेम के श्वेत वस्त्र को जातीवाद के रंग दिए !
अब जातिवाद का दानव हस्ता है, मानवता के इस बौने पर.
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
किसान हमारा अन्नदाता, वो ही ऋण दलदल में डूब रहा,
वो अन्न भी दे और जान भी दे, वाह ये हिसाब तो खूब रहा !
श्रवन करो, जरा ध्यान तो दो, उसके परिवार के रोने पर,
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
राजनीति के रन-छेत्र में, राजनेता ही राज को लूट रहे,
घोटालो के अनगित पाप घड़े, नित दिन ही तो फूट रहे !
आखिर कब तक सोयेगा ये भारत, भ्रष्टाचार के बिछोने पर
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
अन्ना की एक आवाज ने, नौकरशाही को हिला दिया,
बरसो से सोयी अवाम को, क्रांति का अमृत पिला दिया !
तुम फिर भी न निकले कमरों से, और छुपे रहे एक कोने पर,
और तुम कहते हो गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!
लोभी नेता दशको से, देश को दीमक को तरह खाते रहे,
और तुम देश की विषम परिस्थिति पर, नजरे यू हीं चुराते रहे !
अब उठो, थोड़ी तो शर्म करो, मुह ढक के यूँ सोने पर,
फिर सब मिल कहना गर्व है, हमें भारतीय होने पर !!